नईदिल्ली।  इलिट चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (ईसीसीआई) और हिमालयन आशियाना ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में नईदिल्ली के होटल ली मेरिडियन में एजुकेशन कॉन्कलेव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के प्रमुख शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया और नई शिक्षा नीति को आज की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे शिक्षा में व्यापक और सकारात्मक बदलाव आएंगे। पूर्व केंद्रीय संसदीय राज्यमंत्री *सुरेश पचौरी* ने कहा कि विकसित भारत के लिए सबको एक साथ मिलकर कार्य करने की जरूरत है। धर्म और जाति से ऊपर उठकर सभी वर्गों को एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार लाने के साथ भारत को एक ज्ञान आधारित समाज बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रही है। इस अवसर पर *वरिष्ठ पत्रकार एवं देश के विख्यात राजनैतिक विश्लेषक कृष्णमोहन झा* भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा—

नई शिक्षा नीति केवल शिक्षा सुधार का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त साधन है। जब शिक्षा व्यवहारिक, रोजगारपरक और सांस्कृतिक मूल्यों से युक्त होगी तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा। ईसीसीआई जैसे मंच शिक्षा, समाज और उद्योग को जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। ईसीसीआई के मंच से एआईसीटीई के सीओओ बुद्धा चंद्रशेखर शोभित यूनिवर्सिटी के चांसलर कुंवर शेखर विजेंद्र एआईएफटी के चांसलर संदीप मारवाह* सहित कई शिक्षाविदों और उद्योगजगत के प्रतिनिधियों ने भी विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि आज भारत के विश्वविद्यालय वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं और युवा रोजगार लेने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बन रहे हैं|


कार्यक्रम के अंत में  ईसीसीआई के फाउंडर और कॉन्कलेव के आयोजक मानवेंद्र सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “नई शिक्षा नीति भारत के भविष्य को नई दिशा देने वाला दस्तावेज़ है और ईसीसीआई का प्रयास रहेगा कि शिक्षा, उद्योग और समाज को जोड़कर हम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में अपनी भूमिका निभाएँ। मानवेंद्र सिंह के नेतृत्व में आयोजित यह कॉन्कलेव सभी अतिथियों के लिए एक प्रेरणादायी और दिशा-निर्देशक मंच साबित हुआ। उपस्थित वक्ताओं और शिक्षाविदों ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा और समाज को जोड़ने की दिशा में उनके द्वारा किया गया यह कार्य वास्तव में ऐतिहासिक और उल्लेखनीय है।