पत्नी के सोशल मीडिया व्यवहार को क्रूरता मानते हुए पति को तलाक
डिजिटल दुनिया में वैवाहिक मर्यादा: सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट 'मानसिक क्रूरता', जयपुर कोर्ट ने मंजूर किया तलाक
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर की एक फैमिली कोर्ट ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी की है। अदालत ने माना है कि यदि पत्नी किसी अन्य पुरुष के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करती है, तो यह पति के प्रति मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) है। इस आधार पर कोर्ट ने पति के पक्ष में विवाह विच्छेद (तलाक) की डिक्री जारी कर दी।
क्या था पूरा मामला?
एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के व्यवहार से क्षुब्ध होकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। पति की ओर से अधिवक्ता डी.एस. शेखावत ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि पत्नी का आचरण न केवल वैवाहिक गरिमा के विरुद्ध था, बल्कि उससे पति के सामाजिक मान-सम्मान को भी गहरी क्षति पहुंची।
अदालत ने सुनवाई के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं को 'क्रूरता' का आधार माना:
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सोशल मीडिया और डिजिटल साक्ष्य: कोर्ट ने पाया कि सार्वजनिक मंचों पर आपत्तिजनक फोटो साझा करना वैवाहिक विश्वास को खंडित करता है।
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संयुक्त परिवार से अलग होने का दबाव: अदालत ने गौर किया कि पत्नी लगातार पति पर अपने वृद्ध माता-पिता को छोड़ने का दबाव बना रही थी, जिसे भारतीय पारिवारिक मूल्यों के तहत अनुचित और मानसिक प्रताड़ना माना गया।
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अभद्र व्यवहार: पति और उसके परिवार के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना भी उत्पीड़न की श्रेणी में रखा गया।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
कोर्ट ने साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद कहा कि मानसिक क्रूरता का अर्थ केवल शारीरिक मारपीट तक सीमित नहीं है। शब्दों, आचरण और आज के दौर में डिजिटल गतिविधियों के जरिए भी जीवनसाथी को प्रताड़ित किया जा सकता है।
सहमति वापस लेना भी बना आधार
मामले में एक मोड़ तब आया जब पता चला कि पहले दोनों पक्षों ने आपसी रजामंदी से तलाक की अर्जी दी थी, लेकिन बाद में पत्नी ने बिना किसी ठोस वजह के अपनी सहमति वापस ले ली। कोर्ट ने इसे दूसरे पक्ष को मानसिक रूप से परेशान करने की रणनीति करार दिया और इसे भी क्रूरता का एक रूप माना।