मोदी का संदेश — एक दिन नहीं, हर दिन योग! : कृष्णमोहन झा
कृष्णमोहन झा लेखक राजनैतिक विश्लेषक
विश्व के अधिकांश देशों में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर किए गए उत्साहपूर्ण आयोजनों ने इस क्षेत्र में एक बार फिर भारत को अग्रणी स्थान पर प्रतिष्ठित कर दिया है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए जब संयुक्त राष्ट्र ने प्रति वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी तब से योग की वैश्विक स्वीकार्यता में निरंतर इजाफा हो रहा है। पिछले 11वर्षों में दुनिया भर में भारतीय योग के प्रति न केवल आकर्षण बढ़ा है बल्कि उसने इसे अपनी जीवन का अनिवार्य अंग बनाकर उससे लाभान्वित भी हो रहे हैं। इन 11 वर्षों में भारतीय योग ने सारी दुनिया में जो सफर तय किया है उसने दैनिक योग की उपादेयता को भी प्रमाणित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन 11 वर्षों में योग दिवस के अवसर देश दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित योग कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है वह योग के प्रति उनके समर्पण का परिचायक है।यह सर्वविदित है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने हर दिन की शुरुआत योग से करते हैं। प्रधानमंत्री ने समय समय पर अपने उद्बोधनों में जीवन में योग के महत्व को रेखांकित भी किया है।11 वें योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने विशाखापत्तनम से अपने संदेश में योग को जन आंदोलन का रूप देने का जो आह्वान किया है उस पर न केवल गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए बल्कि उस पर अमल भी किया जाना चाहिए। उन्होंने संपूर्ण विश्व के जनमानस से 11 वें योग दिवस को मानवता के लिए योग 2.0 की शुरुआत मानने की अपील करते हुए कहा कि योग विश्व को शांति, स्वास्थ्य और समरसता की ओर ले जा सकता है। मनुष्य को तनाव मुक्त जीवन जीने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति शुरुआत योग से अपने दिन की शुरुआत करके जीवन में संतुलन बना सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कि योग मानवता को एक सूत्र में पिरोने का ऐसा माध्यम है जो मानवता को स्वास्थ्य, सद्भाव और चेतना से जोड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सारी दुनिया जिस तनाव और अशांति के दौर से गुजर रही है उसमें योग की भूमिका एक पाज बटन जैसी है। प्रधानमंत्री ने योग को व्यक्तिगत अनुशासन की एक ऐसी प्रणाली निरूपित किया जिसके अंदर लोगों को ' मैं ' से ' हम ' की ओर ले जाने की सामर्थ्य मौजूद है । प्रधानमंत्री मोदी ने 11 वर्ष पूर्व संयुक्त राष्ट्र में हर वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने के लिए रखे गए भारतीय प्रस्ताव को मिले वैश्विक समर्थन को असाधारण बताते हुए कहा कि उस समय संयुक्त राष्ट्र के 175 देशों ने भारत के प्रस्ताव का समर्थन किया था।यह एक प्रस्ताव पर सहमति मात्र नहीं थी बल्कि मानवता के हित में सामूहिक कदम था जो स्वस्थ और जागरूक दुनिया के लिए साझा दृष्टि कोण का परिचायक है। इसमें दो राय नहीं हो सकती कि पिछले 11 वर्षों में भारतीय योग की वैश्विक स्वीकार्यता में तेजी से इजाफा हुआ है और इसमें प्रधानमंत्री मोदी के महत्वपूर्ण योगदान को अवश्य रेखांकित किया जाना चाहिए। विश्व में इस समय अशांति और तनाव का जो माहौल दिखाई दे रहा है उसने योग की प्रासंगिकता और उपादेयता और बढ़ गई है। प्रधानमंत्री ने 11 वें योग दिवस पर विशाखापत्तनम से सारी दुनिया को संदेश दिया है उसके मर्म को समझने और उसके अनुरूप योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाने की आवश्यकता से इंकार नहीं किया जा सकता।