हमारी आध्यात्मिक संपदा बनाएगी हमें विश्वगुरु : कृष्णमोहन झा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने श्रावण मास के दौरान नागपुर के एक प्रसिद्ध शिवमन्दिर  अभिषेक और पूजा के बाद  वहां उनके उद्गार सुनने के लिए बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुजनों को संबोधित किया। अपने उद्बोधन में संघ प्रमुख ने अपनी इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि भारत अपने धर्म और अध्यात्म के बल पर विश्व गुरु बनने के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है। संघ प्रमुख ने कहा कि दुनिया में कई अमीर देश हैं । हमारा देश भी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है परन्तु भारत को विश्व गुरु का गौरव दिलाने में धर्म और अध्यात्म की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस क्षेत्र में हमारा देश इतना समृद्ध है कि सारी दुनिया हमारे पास आती है और हमारी आध्यात्मिक संपदा को नमस्कार करती है।भागवत ने कहा कि सभी के साथ अच्छाई बांटने और दूसरों के लिए जीने की भावना भारत को महान बनाती है। हमारे पास जो जो सदगुण, शक्ति और बुद्धि है उसका उपयोग दूसरों की भलाई के लिए होना चाहिए।

संघ प्रमुख ने कहा कि कट्टरता इंसान के अंदर घृणा और क्रोध को जन्म देती है जो आगे चलकर युद्ध और लड़ाई का कारण बनती है। दुनिया की सभी समस्याओं की जड़ इंसान की प्रकृति है जो मौजूद पांच छह प्रवृत्तियों में छिपी हुई है। इन प्रवृत्तियों को बदलने के लिए भगवान शिव की उपासना करना चाहिए। व्यक्ति को विनम्रता का जीवन अपनाना चाहिए और सभी के प्रति करुणा रखना चाहिए। हर दिन इस पवित्र जीवन शैली की ओर कदम बढ़ाना ही वास्तव में भगवान शिव की सच्ची भक्ति है। हमें भगवान शिव के समान निर्भय बनने की राह पर चलना चाहिए जो सर्प को भी गले में लपेटे रहते हैं क्योंकि उन्होंने हलाहल पिया है। भूत ,प्रेत , पिशाच उनके गणों में हैं। राक्षस उनके गणों में हैं।  देवता भी उनकी पूजा करते हैं इसीलिए उन्हें महादेव कहा गया है।संघ प्रमुख ने कहा कि निर्भयता, पवित्रता, त्याग, परोपकार, सेवा, ये सब जीवन का हिस्सा होना चाहिए। इनसे अपना जीवन भी अच्छा बनता है और समाज का भी भला होता है। मोहन भागवत ने कहा कि हम जो उत्सव करते हैं पूजा आराधना करते हैं ये सब अच्छी बातें हैं लेकिन केवल इतने तक सीमित नहीं रहना है।इनका जीवन से संबंध है इसलिए इस दिशा में और आगे बढ़ने की आवश्यकता है। संघ प्रमुख ने अच्छाई को बांटने और नकारात्मकता को अपने अंदर समेट कर खत्म देने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज ऐसे व्यवहार के कारण ही चलता है। संघ प्रमुख ने आगाह किया कि दुनिया बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे में व्यक्ति को सही समय पर सही कदम उठाने की जरूरत है अन्यथा  विनाश हो सकता है और अगर वह सही दिशा में कदम बढ़ाए तो मानवता  नयी ऊंचाईयों को स्पर्श कर सकती है।