27 अगस्त जन्मदिवस पर विशेष

आज से लगभग दो दशक  पूर्व मैं जब राज्य के एक पिछड़े आदिवासी जिले मंडला की सीमाओं से बाहर निकल कर मध्यप्रदेश की राजधानी को अपनी कर्मभूमि बनाने के इरादे से भोपाल में पदार्पण किया तो शुरुआती काल में मेरी राह आसान नहीं थी ।कई बार  मन विचलित भी हो जाता था तभी  एक दिन राजधानी के ख्यातिलब्ध वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा से मेरी भेंट हुई। उन्हें पहली मुलाकात में मैंने भाई साहब कहकर संबोधित किया। इसके प्रत्युत्तर में उन्होंने मुझे जो निश्छल अनुजवत् स्नेह प्रदान किया उससे मुझे यह अनुभूति हुई मानों वे मेरे  जन्मजात सहोदर हैं। राजधानी में  जब मैं पहचान बनाने के लिए संघर्षरत था तब उन्होंने मुझे हमेशा संबल प्रदान किया। उस पहली संक्षिप्त भेंट में ही उन्होंने जो आत्मीयता प्रदर्शित की उसमें कहीं कृत्रिमता का भाव नहीं था। उस दिन मैंने उनके जिस सरल ,सरल और निरभिमानी स्वरूप के दर्शन किए थे वह आज भी यथावत कायम है । अतीत में राष्ट्रीय एकता समिति के उपाध्यक्ष के रूप में उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी मिल चुका है , वे अनेक सरकारी ,गैर सरकारी संस्थाओं के वरिष्ठ पदाधिकारी भी रहे हैं , राष्ट्रीय स्तर के सुप्रतिष्ठित पत्रकारों में उनकी गणना प्रमुखता से की जाती है परन्तु इतनी सारी उल्लेखनीय उपलब्धियां के बावजूद उन्हें  अहंकार कभी छू भी नहीं पाया। किसी भी मौसम में या किसी भी दौर  में उन्होंने अपना ' चोला ' नहीं बदला।  उनके सात्विक विचारों को सुनकर कोई अपरिचित भी उनके बारे में यही धारणा बना सकता है कि वे अंदर और बाहर से वे एक जैसे हैं। गौरवर्णी शर्माजी के श्वेत धवल परिधानों की भांति ही उनका अंतःकरण भी निर्मल है। अपने घोर प्रतिद्वंद्वी का भी बुरा करने की बात तो दूर , किसी के लिए  अपशब्दों का प्रयोग भी आप उनके मुख सेखन  कभी नहीं सुन सकते। उनके इसी  गुण को मैं उनकी सबसे बड़ी पहचान मानता हूं।

रमेश शर्मा  हिन्दी पत्रकारिता के सुपरिचित हस्ताक्षर हैं। 'दैनिक जागरण' और ' राष्ट्रीय सहारा ' सहित अनेक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में उन्होंने महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए उन संस्थानों को शिखर की ऊंचाईयों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अनेक समाचार पत्र पत्रिकाओं के स्तंभ लेखक के रूप में उन्होंने जो लेखन किया है उसमें उनके अध्ययन मनन और चिंतन की गहराई स्पष्ट परिलक्षित होती है। सनातन और अध्यात्म के क्षेत्र में रमेश शर्मा जी की गहन अभिरुचि है । अध्यात्म में उनकी इसी अभिरुचि ने उनके चिंतन को बहुजन हिताय बहुजन सुखाय बनाया है। अध्यात्म के क्षेत्र में उन्होंने जो सात्विक साहित्य सृजन किया है उसका गंभीरतापूर्वक अध्ययन मनन किसी को भी उनके प्रति श्रद्धावनत कर सकता है। ऐसे कर्मयोगी पत्रकार, साहित्यकार, समाजसेवी आध्यात्मिक विभूति को उनकी यशस्वी जीवन के नववर्ष के शुभारंभ के पुनीत अवसर पर मैं सादर नमन करते हुए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं।